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🤗|He was like... |

He was like the snowfall Slow but fulfilling Beautiful but dangerous in excess Cold yet so pure Who made my life complete with just a strand of his touching the ground of my heart He was like the winds Cold or hot as per the weather Heavy as hell or light as a feather Uneasy yet settled Who just passed through me in transparency and left few beautiful scars of his presence He was like the morning sun Light yet so brightening And in remarkable ways bringing a difference To so many people, to so many lives And adding so much of significance He was like the rains Unpredictable yet awaited Showery or drizzly Expressive yet reserved Who just drenched me in a way that no wind or sun could repair the agony his little drops created He was like the stars Far, hard to reach, yet glittery Made me lose myself so simply Admired by everyone but truly loved by me I wish he knew that he belonged just to me Medhavi 27.02.15 ...................................

🎈कई मंज़िलें उलझी सी थी

कई राहें अजनबी थी, कई मंज़िलें उलझी सी थी, पर बस तेरा साथ पूरा था, इसलिए सफ़र की उम्मीद भी थी, कई बातें मैं खुद समझ ना सकी, बस साथ साथ चलती रही, कोई सवाल ना उठाया, कुछ पूछा भी नहीं, ख्वाब जो दिखाए देखती रही, काई मंज़र ऐसे भी आए, जब तुम्हे हमारी ज़रूरत ना थी, हम पीछे खड़े रहे, और एक भी हसरत ना की, कई दफ़ा पुकारा तुमने, हम एक आवाज़ पर आ गये, इकरार ना किया कभी तुमसे, पर मोहब्बत निभाते रहे, काई मौके खुशी के थे, तुम बाँटने भी हम से आए, बिना किसी वजह के यूँ ही, ना जाने क्यूँ इतने बादल बरसाए, काई सदायें तुम सुन ना सके, हूमें आदत सी पड़ने लगी, तुम्हे लगा हम अब भी साथ हैं, पर हूमें दूर तुम खुद से करने लगे, काई ख्वाब तुमने मेरे तोड़े, हम वफ़ा-ए फिर भी करते रहे, तुम्हे खुशियाँ दे बस हम, तिनका तिनका कर बिखरते रहे, काई ज़र्रे हमारे तुम्हे छू कर गुज़रे, तुमने उन्हे भी पराया समझा, हम हवाओं क झोंकों को शायद, ख्वाबों का महल समझते रहे, काई दफ़ा तुम्हे आगाह किया, खो दोगे हूमें पर तुम समझे नहीं, हम साथ साथ बस चलते रहे, पर राहें अब मुड़ने लगी, काई काफिले गुज़रते रहे, तक़दीर के पन्ने पलटने लगे, देखो हम ज...

Pending . Ek hazaar...

Ek hazaar baatein har roz sochti hun Jo karni hongi tumse har roz sochti hun Dohraati hun kuch baatein Phir zehen se mitaati hun Iss tarah poore din main Sirf tujhe soch k bitaati hun Ek hazaar saansein har roz behekti hain Naam tera le kar pal pal yeh mehekti hain Samjhaati hun kuch khud ko Phir khud ko behelne deti hun Iss tarah main khud se Kuch jhoothe vaade kar leti hun Ek hazaar sapne har roz main dekhti hun Khud ko tere saath hi main sanjo k rakhti hun Taqdeer ke faislon se pare In katron ko main samet-ti hun Iss tarah ek aashiyaan main Khwaab sheher se khareedti hun Ek hazaar kisse ek mulaaqaat se nikaalti hun Jo baat ek baar huyi thhi uspar phir se main hasti hun Jo raah kahin nahin nikalti Uss raah par manzil ki talaash hai kyun Jiss baat ka koi wajood nahin Ussi baat se shuru har khwaab hai kyun Jo lafz tujh tak pahunchenge nahin Uss khaamoshi mein aawaaz hai kyun Jiss hadh se hum guzrenge nahin Uss daayare se pare yeh ehsaas hain kyun Ek h...

🎈मोहब्बत उसे हो ना सकी

मोहब्बत उसे हो ना सकी, और मुझे बस होती रही, वो दूर से बस देखता रहा, और इस पार आग लगती रही. वो मुस्कुरा कर कभी, तो कभी बातों में यूँ ही, करता होगा ज़िक्र मेरा भी, और हद देखो दीवानगी की, की इस्सको इशारा कोई मैं समझती रही. वो कहीं से शायद, देख रहा होगा चाँद यह, या झोंका यह हवा का, छू कर आया होगा उसको ही, यही सोच सोच रात भर, यह चाँद मैं तकती रही. जो वादा लिया भी नहीं, उसके पूरे होने की उम्मीद करती रही, मोहब्बत उसे हो ना सकी, और मुझे बस होती रही, वो दूर से बस देखता रहा, और इस पार आग लगती रही. Medhavi 21.02.15

🤗|अजनबी बन गये थे तुम|

अजनबी बन गये थे तुम, राहें जुड़ा हो गयी थी, फ़ासले बढ़ गये थे यूँ, की पहचान कहीं खो गयी थी. टूटे हुए टुकड़े दिल के, आज भी चुभ जाते हैं कभी कभी, संग तेरे बिताए लम्हे, आज भी छू जाते हैं कभी कभी. अब तेरी तस्वीर देखती हूँ जब, तो बस दर्द सा उठ-ता है, ज़िंदगी गुज़र रही है लेकिन, हर लम्हा बस तेरी राह तकता है. छूट चुका तू मेरे हाथों से, फिर भी दिल से छूट ना सका, यह दीवाना दिल चाहा था जिसने तुझे, ज़रा देर भी तुझसे रूठ ना सका, तू बेख़बर यह सोच सुकून से है, की भूल गयी तुझे या नफ़रत मैं करने लगी, तुझे शायद ना होगी खबर कभी, मोहब्बत तब भी करती थी और बस यूँ ही करती रही. Medhavi 21.02.15

🏴|ना जाने क्या जादू था उसमें|

ना जाने क्या जादू था उसमें, की पल भर में मेरी पूरी दुनिया बदल डाली.  मुझे लगा की वो सिर्फ़ एक मंज़र था,  पर ना जाने क्यूँ हर ज़ररा वहीं ठहेर गया. आईने में खुद को देख ,  मैं और खूबसूरत लगने लगी.  कल तक थी जो राह अंजानी,  उसे मैं किस्मत कहने लगी. ना जाने क्यूँ हया सी खुद से आने लगी, जो ना तही मैं कभी वो उसकी दूरी बनाने लगी, उसने जहाँ जहाँ छुआ था, उस हर अंग को हल्के हाथों से छूने लगी, ना जाने क्या जादू हुआ था, की खुद में ही कहीं मैं खोने लगी. अब ना समझ पा-उ मैं इस दीवानगी को, एक मुलाक़ात बस यह आगाज़ कर गयी मुझ पर, वो रात गुज़र गयी एक पल में कुछ यूँ, की यकीन हो चला एक दाफफा और खुद पर Medhavi 07.02.15

🤗|इस अफ़साने को नाम ना दो|

इस अफ़साने को नाम ना दो, खूबसूरत है खूबसूरत रहने दो, ना दो कोई रुतबा, कोई पहचान इसको, मोहब्बत सा लगे, तो मोहब्बत लगने दो. खुशी अगर दे, तो बस महसूस होने दो, दर्द दे अगर, तो अश्क़ बहने दो, लिखने दो तक़दीर खुदा को, एक नज़्म बनने दो. ज़रिया ना ढूँधो मुलाक़ात का, करने दो साज़िशें इन हवाओं को, बहने दो शिकारा इस जज़्बात का, फिर घुलने दो खुद में फ़िज़ाओं को. चाँद को बिखेरने दो चाँदनी दिल के आँगन में, आँखें बाँध करके खोने दो इस चाँदान में, बाहों में क़ैद कर लो एक हसीन सा लम्हा, फिर महसूस करो हर रात उस एहसास को. नाम ना दो, पहचान ना दो, बेनाम रहने दो इस काफिले को, गुज़रने दो फिर यह रात, उस एक रात के आगाज़ में, बिखरने दो खुद को, फिर इस मदहोश एहसास में. Medhavi 06.02.15