🎈मोहब्बत उसे हो ना सकी
मोहब्बत उसे हो ना सकी,
और मुझे बस होती रही,
वो दूर से बस देखता रहा,
और इस पार आग लगती रही.
और मुझे बस होती रही,
वो दूर से बस देखता रहा,
और इस पार आग लगती रही.
वो मुस्कुरा कर कभी,
तो कभी बातों में यूँ ही,
करता होगा ज़िक्र मेरा भी,
और हद देखो दीवानगी की,
की इस्सको इशारा कोई मैं समझती रही.
वो कहीं से शायद,
देख रहा होगा चाँद यह,
या झोंका यह हवा का,
छू कर आया होगा उसको ही,
यही सोच सोच रात भर,
यह चाँद मैं तकती रही.
जो वादा लिया भी नहीं,
उसके पूरे होने की उम्मीद करती रही,
मोहब्बत उसे हो ना सकी,
और मुझे बस होती रही,
वो दूर से बस देखता रहा,
और इस पार आग लगती रही.
Medhavi
21.02.15
21.02.15
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