🎈|हम उसे अब भी याद करते हैं|

वो निगाहों से पिलाती है मै कोई,
कुछ उसकी मौजूदगी का नशा हो गया है,
पहले जहाँ देखता था, वहाँ दिखती थी वो,
अब तो मैखाने से भी उसकी खुश्बू ही आती है.

मैं हर जाम उसके नाम का पीता हूँ,
ना जाने है वो कहाँ, उसके ख़याल मैं बुनता हूँ,
आस पास कहीं नहीं,मगर,
उसकी आहटें मैं सुनता हूँ.

रंगों सा घुलता हुआ रूप उसका,
मेरी नज़र के सामने अब भी वो छाती है,
अब भी उसका वही पुराना किस्सा,
हर बूँद बूँद दोहराती है.

पहले तो उसकी हँसी देखने को जीते थे,
अब उसे देखने को मरते हैं,
कोई जा के बताए उसको कभी,
हम उसे अब भी याद करते हैं.

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