🎈|शेर (three)|

|हर लम्हे में थम गया ज़िंदगी का कारवाँ,
चार कदम यूँ एक काफिला बन गये,
चलते चलते आ गये हम कहाँ,
रास्ते मंज़िल, मंज़िल रास्ते बन गये.

मेधावी
06.02.15|

इश्क़ पर ज़ोर नहीं,
आतीशों में कहीं,
दफ़्न हुई एक चिंगारी,
ज़ररा ज़ररा जलता रहा,
सदियों एक लम्हा गुज़रता रहा,
फिर शुरू हुई वही कहानी.

-मेधावी
06.03.15

ख़याल हैं बहुत से,
काग़ज़ पर कैसे उतारुन,
तुझ तक हर लफ्ज़ पहुँचेगा,
हर ज़ररा कायानात का कैसे लिख डालूं.

मेधावी
07.04.15

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