कहीं तुम में ही.

यह हवा, बरखा, बारिश,
करेंगे फिर तेरी यादों की साज़िश.

यह चंदा, सूरज, तारे,
लड़ पड़ेंगे तुझसे सारे.

भुलाने की मुझे अगर,
तू कोशिश भी करेगा,
मेरे ख़याल के साथ,
तेरा अश्क़ भी बहेगा.

इस हवा को, बूँदों को, चाँदनी को,
इन्हे देख, महसूस कर,
मुझे छूना हल्के-हल्के,
ना राहें बदलेंगी यह,
ना आ सकूँगी तेरे करीब मैं चल के.

पर कुछ रहेगा मेरा भी जुड़ा हुआ सा तुझसे,
कोई किस्सा, या काग़ज़ का टुकड़ा,
कोई चीज़, क़िस्सी याद हिस्सा,
ना दोष देना मुझे तब, यही सोचना,
होश मेरे भी गुम होंगे, कहीं तुम में ही.

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