|शमा मोहब्बत की बुझा चुके थे|

शमा मोहब्बत की बुझा चुके थे,
हम मोहब्बत की अदा भुला चुके थे,
वो आए और हमें और उजालों की ओर ले चले,
मोहब्बत से हमको फिर से वाकिफ़ वो करने लगे,
दे कर मुझे बरसातें वो बूँद को तरसते रहे,
हमारी खातिर वो खुशियाँ बन बरसते रहे,
उनकी कद्र समझते कैसे,
खुद इतने हम टूट चुके थे,
खुद को मुकम्मल करते कैसे,
इतने अधूरे हम छूट चुके थे,
पर मोहब्बत फिर करने ही हिम्मत वो देने लगे,
हर लम्हा हूमें वो कीमती होने का दर्जा देने लगे,
अब ख़ौफ्फ ज़रा कम है और मंज़िलें सॉफ हैं,
अब मोहब्बत के आशियाने की शायद यह एक शुरूवात है.
Medhavi
12.11.14

Comments

Popular posts from this blog

🫧 neend

Para. Life goes on... with or without someone..( A Story )

thokar 🤞