🎈|हवा का रुख़ है बदला|

हवा का रुख़ है बदला,
या जुड़ गयी दो तक्दीरे,
कहने को गुज़रा एक लम्हा,
पर बन गयी यादें यह तस्वीरें.

आईना है सॉफ पर,
नज़र ढुँधलाई सी है,
सवाल है आज पर,
कल की फ़िक्र छाई सी है.

फिर आँखों में ना खो जायें,
मोहब्बत की लगाम को थामो,
यूँ हम बहेक ना जायें,
फिर ना ऐसे मुस्कुराव.
तक्दीरे बदलने का शौक रखने वाले का,
ऐतबार करना चाहे दिल अब उपर वाले का.

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