🤗|सोचा आज की खत लिखें|
सोचा आज की खत लिखें,
तुम्हे यूँ ही, बेमतलब लिखें.
खामोशियों की तस्वीर उतारें,
तूफ़ानों का ठहराव सावारें,
बेरंग ज़िंदगी में होली सी लायें,
और बेहद गहराइयों के जाम बनायें.
सोचा आज की खत लिखें,
तुम्हे यूँ ही, बेमतलब लिखें.
कुछ ताल्लुक बढ़ायें तुमसे,
कुछ बतायें और पूछें तुमसे,
कुछ सवाल हों लफ़्ज़ों में लिपटे हुए,
कुछ ख़याल हों लम्हों में उलझे हुए.
सोचा आज की खत लिखें,
तुम्हे यूँ ही, बेमतलब लिखें.
जिससे पढ़ तुम बस मुस्कुराव,
इंतेज़्ज़ार में हक़ीक़तों के, नये ख्वाब सजाओ.
फिर खत को दोबारा जब पढ़ना,
उसके लिए एक जवाब भी लिखना,
क्यूंकी बाकी सब गुम जाता है वक़्त के साथ,
पर इन खातों की ज़िंदगी रहती है किस्मत के हाथ.
तुम्हे यूँ ही, बेमतलब लिखें.
खामोशियों की तस्वीर उतारें,
तूफ़ानों का ठहराव सावारें,
बेरंग ज़िंदगी में होली सी लायें,
और बेहद गहराइयों के जाम बनायें.
सोचा आज की खत लिखें,
तुम्हे यूँ ही, बेमतलब लिखें.
कुछ ताल्लुक बढ़ायें तुमसे,
कुछ बतायें और पूछें तुमसे,
कुछ सवाल हों लफ़्ज़ों में लिपटे हुए,
कुछ ख़याल हों लम्हों में उलझे हुए.
सोचा आज की खत लिखें,
तुम्हे यूँ ही, बेमतलब लिखें.
जिससे पढ़ तुम बस मुस्कुराव,
इंतेज़्ज़ार में हक़ीक़तों के, नये ख्वाब सजाओ.
फिर खत को दोबारा जब पढ़ना,
उसके लिए एक जवाब भी लिखना,
क्यूंकी बाकी सब गुम जाता है वक़्त के साथ,
पर इन खातों की ज़िंदगी रहती है किस्मत के हाथ.
Comments
Post a Comment