🤗|तेरी याद का ठिकाना|
तेरी याद का ठिकाना,
मेरे ज़हेन के किनारों में घर कर गया है,
तुझे ढूँढने की अब ज़रूरत नहीं पड़ती,
तुझे छूनेकी अब तड़प नहीं उठती.
तू मुझमें है बनके मेरी धड़कनों का अफ़साना,
तेरे होने से मैने अपने दायरों को पहचाना,
मौजूदगी तेरी मेरे कमरे में हर वक़्त क्यूँ महसूस होती है,
सुबा शाम तेरे आगाज़ से हर ज़ररा मेरा क्यूँ मघरूर होता है.
तू ना हो सका मेरा,
ना मैं तेरी बन सकी,
ना उस सहर पे नाम था मेरा,
ना वो शभ तेरे नाम ढाल सकी,
बस मोहब्बत मेरा वजूद बन गयी,
घम और खुशी के बीच की हद बन गयी.
तेरी याद के ठिकाने रोज़ बदलते हैं,
ज़हेन के एक कोने से दूसरा कोना लेते हैं,
तुझे भुला दूं, अब तक वो मौसम ज़िंदगी का आया नहीं,
और तुम पूछते हो क्यूँ अब तक हुँने तुमको भुलाया नहीं,
मोहब्बत होती आए काश तुम्हे भी,
नाम मेरा होता या किसी और का,
कम से कम यह आशिकी होती तुम्हे भी.
मेधावी
06.11.14
मेरे ज़हेन के किनारों में घर कर गया है,
तुझे ढूँढने की अब ज़रूरत नहीं पड़ती,
तुझे छूनेकी अब तड़प नहीं उठती.
तू मुझमें है बनके मेरी धड़कनों का अफ़साना,
तेरे होने से मैने अपने दायरों को पहचाना,
मौजूदगी तेरी मेरे कमरे में हर वक़्त क्यूँ महसूस होती है,
सुबा शाम तेरे आगाज़ से हर ज़ररा मेरा क्यूँ मघरूर होता है.
तू ना हो सका मेरा,
ना मैं तेरी बन सकी,
ना उस सहर पे नाम था मेरा,
ना वो शभ तेरे नाम ढाल सकी,
बस मोहब्बत मेरा वजूद बन गयी,
घम और खुशी के बीच की हद बन गयी.
तेरी याद के ठिकाने रोज़ बदलते हैं,
ज़हेन के एक कोने से दूसरा कोना लेते हैं,
तुझे भुला दूं, अब तक वो मौसम ज़िंदगी का आया नहीं,
और तुम पूछते हो क्यूँ अब तक हुँने तुमको भुलाया नहीं,
मोहब्बत होती आए काश तुम्हे भी,
नाम मेरा होता या किसी और का,
कम से कम यह आशिकी होती तुम्हे भी.
मेधावी
06.11.14
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