🎈|तुम टूट रहे हो मेरी तक़दीर से|

तुम टूट रहे हो मेरी तक़दीर से,
या यह डोर हमेशा से ही कच्ची थी,
क्यूँ बाँधने दिया मैने खुद को मोहब्बत की ज़ंजीर से,
मैं तो बेपरवाह ही अच्छी थी.

    Medhavi
- 17th Oct'14

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